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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



माँ सरस्वती वंदना


नरेश गुर्जर


 
 

अंधकारमय इस को माँ तुमने दिया है उजियारा,
घोर अंधेरा छाया था, तुमने ज्ञान का दीप जलाया,
थे नर पशु सब एक समान, माँ तुमने दिया विद्या का दान,
असभ्य को सभ्य बनाया, दिया हृदय में करूणा को स्थान, 
तुम्हारी महिमा निराली जग में, होता है तुम्हारा ही गुणगान,
विद्यालय है तुम्हारा मंदिर, रहती हो जहाँ तुम विद्यमान, 
करता हूँ वंदना तुम्हारे चरणों की, माँ रखना कृपा मुझ पर सदा एक समान


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