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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



बातें


कामिनी कामायनी


 
कोई पत्थर /
रेत का कण /
ईंट के टुकड़े /
और नहीं /
तो एक तिनका ही सही /
जानते हैं /
सब कुछ /जिसे औरों से /
छुपाने के लिए /
जिससे औरों को हराने के लिए /
लोगों ने बनाया था /
अपना एक घातक हथियार /
बिना किसी लागत के /
किसी खास कार्य कुशलता के /
किसी प्रकार के वित्तीय सहायता से /
बनता वह प्रक्षेपास्त्र /
लुटता रहा था सर्वस्व किसी का /
भड़का दिए कितने ही दावानल /
झुलसा दिए दसों दिशाएँ /
छीन लिए कितने सारे चैन /
बंद करवा दिए  रास्ते कितने  /
तुड़वा किए कितनो के  घर /
करवा दिए पागल कितने /
किसी से छुपा कहाँ था कुछ भी /
कि परदे के पीछे से /
सूत्र संचालन करता /
बनाता/बिगाड़ता है /
कौन इतिहास /
समय भी जानता है /
वह तो बात है/ बस बात ।
फिर भी लोग /
क्यो खा जाते है धोखा इससे ?

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