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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



शिव होना पड़ता है


अर्विना गहलोत


 
विष पीना हो तो शिव होना पड़ता है।
इस दिल को शिवालय होना पड़ता है।

ऐसे हालातो से खुद को लड़ना पड़ता है।
संघर्षों की धधकती ज्वाला में खुद को उतरना पड़ता है।
अंगारों पर  खुद को चलना पड़ता है ।
कुन्दन सा सब को तपना पड़ता है।

विष पीना हो तो शिव होना पड़ता है।
इस दिल को शिवालय होना पड़ता है ।

दूसरों की खातिर खुद को लड़ना पड़ता है।
दर्द सहने की खातिर सीना पत्थर करना पड़ता है।
कृष्ण को पाने की खातिर खुद को विष पीना पड़ता है।
मीरा सा दीवाना होना पड़ता है। 

विष पीना हो तो शिव होना पड़ता है ।
इस दिल को शिवालय होना पड़ता है।

दुष्टों से अस्मत बचाने के लिए ।
पद्मावती सा जोहर करना पड़ता है।
भारत माँ की खातिर शीश न्योछावर करना पड़ता है।
देश की रक्षा की खातिर सीमा पहरा देना पड़ता।

विष पीना हो तो शिव होना पड़ता है। 
इस दिल को शिवालय होना पड़ता है।

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