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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


 
  (1)

धीमी बारिश
फुहारें फुर फुर
शीत लहरें।

  (2)

लोग बाहर
थर थर काँपते
भीत गिरती।

  (3)

कच्चा मकान
दीवारें गिर रहीं
नालियाँ जाम।

  (4)

पाँव पसारे
पानी आँगन द्वार
निकास नहीं।

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