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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



जमाने को इतने भी प्यारे न होंगे


डॉ. रंजना वर्मा


 
जमाने को इतने भी प्यारे न होंगे ।
अगर  साँवरे  के  सहारे  न होंगे ।।

कन्हैया पकड़ ले जो पतवार मेरी
तो  तूफ़ान  के  ये  नज़ारे  न  होंगे ।।

पूकारा है शिद्दत से घनश्याम तुमको
तुम्हें    लोग   ऐसे   पुकारे   न   होंगे ।।

न पूछे कोई चाँदनी रात को ग़र
चमकते गगन में  सितारे न होंगे ।।

मिला वक्त जो भी है हँस कर बिता लो
पता क्या कि हम  कल  तुम्हारे न होंगे ।।

ढलेगी उमर वक्त आयेगा वो भी
कि जब जिंदगी के इशारे न होंगे ।।

जिये हैं सदा दर्द  की  बस्तियों में
चलो अब जहाँ ग़म के मारे न होंगे ।।

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