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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



दोहे रमेश के नववर्ष पर (2018 )


रमेश शर्मा


 
 
पन्नो मे इतिहास के, लिखा स्वयं का नाम !
दो हजार सत्रह  चला,..यादें छोड तमाम !!

दो हजार सत्रह  चला, छोड सभी का साथ !
हमें थमा कर हाथ में,. नये साल का हाथ !!

हो जाए अब तो विदा,... कलुषित भ्रष्टाचार !
यही सोचकर आ गया,जी अस टी इस बार !!

ढेरों मिली बधाइयाँ,……बेहिसाब संदेश !
मिली धड़ी की सूइंयाँ,ज्यों ही रात “रमेश”!!

मदिरा में डूबे रहे, …लोग समूची रात !
नये साल की दोस्तों, यह कैसी सुरुआत !!

नये साल की आ गई, नयी नवेली भोर !
मानव पथ पे नाचता, जैसे मन मे मोर !!

नये साल का कीजिये, जोरों से आगाज !
दीवारों पर टांगिये, .नया कलैंडर आज !!

घर में खुशियों का सदा,. भरा रहे भंडार !
यही दुआ नव वर्ष मे,समझो नव उपहार !!

आयेगा नववर्ष में, …..शायद कुछ बदलाव !
यही सोच कर आज फिर, कर लेता हूँ चाव !!

जाते-जाते दे गया, घाव कई यह साल !
निर्धन हुए अमीर तो, भ्रष्ट हुए कंगाल !!


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