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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



भले इंसान -


सुभाष चन्द्र


भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़ के देता है। यह बात मंगतू वर्षों से सुनता रहा है लेकिन उसका छप्पर कभी नहीं फटा। अचानक दस नवंबर के दिन उसे उसके मालिक सुखी लाला ने बुलाया और कहा, " सुना है तुम्हारी बिटिया की कुछ दिनों में शादी है। पैसे की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं। " फिर उन्होंने एक लिफाफा मंगतू की तरफ बढ़ाते हुए कहा, " हजार - हजार के नोटों की दो गड्डी हैं। एक लाख अपने पास रख लेना और एक लाख मुझे लौटा देना। बैंक में कोई पूछे तो बता देना कि जब सगुना बेटी तीन वर्ष की थी, तभी से उसकी शादी के लिए पेट काटकर बचा रहे थे। और बाहर मुनीम को फॉर्म भरवाने साथ ले जाना। मेरे बाकी एक लाख धीरे - धीरे चुकाते रहना। " मंगतू लिफाफा हाथ में पकड़े हुए सोच रहा था, " भले इंसानों की दुनिया में आज भी कमी नहीं है। "

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