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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



अनुभव -


सुभाष चन्द्र


महीनों बाद आज उसने फिर याद किया था। सुबह उसका फोन आया था। मेरी और मेरे परिवार की खैरियत पूछ रहा था। मैंने पूछा, " बताओ, कैसे याद किया है ? " वह हँसते हुए बोला, " बहुत दिनों से सोच रहा था लेकिन मौका नहीं मिला। कल रात ही फैसला कर लिया था कि सुबह आपको फोन जरूर करूंगा। " यह कहकर उसने फोन रख दिया। बहरहाल , वह कुछ भी कहे; अपने अनुभव के आधार पर मैं जानता हूँ कि शाम तक उसका फोन आज दुबारा आएगा और फिर वह कोई न कोई काम बताएगा। दरअसल, पिछले चालीस वर्षों से उसने बेमतलब बात करने की गलती कभी नहीं की।

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