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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



काश मैं एक पंछी होती

प्रिया देवांगन

काश मैं एक पंछी होती,
मस्त गगन मे उड़ जाती ।
ताजा ताजा फल खाती,
सबको मीठी गीत सुनाती ।
जग की पूरी सैर करती,
नये नये दोस्त बनाती ।
नदी झील की पानी पीती,
वन उपवन में घूम आती ।
सुबह से उठ कर मैं चहचहाती,
मीठी नींद से सबको जगाती ।
सबके मन मे जगह बनाती,
जीवन मे खुशियाँ मैं लाती ।
उड़ कर अपनी मंजिल पाती,
हर मंजिल मैं उड़कर जाती ।
फल फूल मैं खूब खाती,
बच्चों के पास आ जाती 
काश मैं एक पंछी होती,
मस्त गगन में उड़ पाती ।
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