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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



मेरा गाँव

महेंद्र देवांगन

मेरा गाँव है बड़ा सुहाना, 
पीपल का है छांव पुराना।
जिसमें बैठे दादा काका, 
ताऊ भैया और बाबा ।
तरह तरह की बातें बताते, 
नया नया किस्सा सुनाते ।
कभी नही वे लड़ते झगड़ते, 
आपस में सब मिलकर रहते ।
सुख दुख में सब देते साथ,
देते हैं हाथों में हाथ ।
चारों ओर है खुशियाँ छाई, 
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ।
तीज त्योहार मिलकर मनाते,
आपस में हैं गले मिलाते ।
स्वच्छ सुंदर मेरा गाँव, 
चारों ओर हैं पेड़ों की छांव ।

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