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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



संधिपत्र

गुर्रमकोंडा नीरजा

दुश्मनों की दुआ 
और दोस्तों की मेहरबानी
मेरे जीवन की
बस यही है कहानी’

-	चाहूँ तो तुम्हारी तरह मैं भी 
कोस सकती हूँ सारी दुनिया को;
पर ऐसा भी क्या गुस्सा 
कि जीवन बीत जाए, गुस्सा न बीते.

इसलिए भेजा करती हूँ हर सुबह 
तुम्हारे लिए दोस्ती के गुलाब.
तुम विजेता हो – चिर विजेता;
मैं पराजित हूँ – प्रेम में पराजित. 

कभी तो मैं बनकर देखो ......
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