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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



प्रगति

बृजेन्द्र अग्निहोत्री

 सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक 
प्रगति के लिए मिली आजादी का 
हो रहा दुरुपयोग.

यदि हो इसका सदुपयोग
तो व्यक्ति,
अपना, अपने घर-परिवार और देश-समाज का 
सर्वोत्तम विकास कर सके.

लेकिन,
अद्यतन युवा पीढ़ी ही नहीं,
समाज का अधिकांश वर्ग 
आजादी का उपयोग करने में 
अपनी संस्कृति, सभ्यता को 
ताक पर रख देता है.

फलतः 
पतन की गर्त में 
दिनोंदिन दबता चला जाता है 
और खुश हो, सोचता है.....
‘हम प्रगति कर रहें हैं ?’
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