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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



उल्टा पंखा क्यों चलता है

डॉ०अनिल चड्डा

 
मरने से पहले क्यों मरता है,
अहं तू खुद पर क्यों करता है ।

बढ़ना आगे सबको आता,
रस्ता नहीं पर क्यों मिलता है ।

सोच अगरचे अच्छी है तो,
सच्चाई से क्यों डरता है ।

ऊंचाइयों पर उठने पर तू,
फिसल के नीचे क्यों गिरता है ।

समय ने भी समझाया तुझको,
जिद पर अपनी क्यों अड़ता है ।

गर्द जमी है, कैसे उडाऊं,
उल्टा पंखा क्यों चलता है ।
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