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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



ज़िन्दगी में खोना पाना लगा रहता है

अमिताभ विक्रम


ज़िन्दगी में खोना पाना लगा रहता है, थके जिस्म से रूह का जाना लगा रहता है।
कोई नहीं बहाता ग़ैरों के लिए अपने आँसू, अपनों के जाने पै वहीँ समुंदर भरा रहता है।
वो ही करतें हैं अक्सर वफाओं की बातें, बेवफ़ाई का ग़म जिनके सीनों में भरा रहता है।
इस जहाँ में सारी लड़ाई बस रोटी की है, किसी का पेट कम तो किसी का ज़्यादा भरा रहता है।
किसी का दिल ना तोड़ना इस जहान में, बिना दिल के इन्सां कब इन्सां बना रहता है।
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