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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



नए वर्ष में

आचार्य बलवंत


गीत खुशी के मिलकर गाएँ नए वर्ष में। समरसता के दीये जलाएँ नए वर्ष में। जीवन की सूनी राहों को रोशन कर, जन-मन में उल्लास जगाएँ नए वर्ष में। बीज प्यार के मन में बोएँ नए वर्ष में। सपने नये-नये संजोएँ नए वर्ष में। कुछ करने की क़समें खाएँ नए वर्ष में। जन-मन में उल्लास जगाएँ नए वर्ष में। जो भी त्याज्य है, उसको त्यागें नए वर्ष में। आलस्य छोड़कर नींद से जागें नए वर्ष में। सच्चाई का साथ निभाएँ नए वर्ष में। जन-मन में उल्लास जगाएँ नए वर्ष में। आज के काम न कल पर टालें नए वर्ष में। काम समय पर ही कर डालें नए वर्ष में। सोच-समझ कर कदम बढ़ाएँ नए वर्ष में। जन-मन में उल्लास जगाएँ नए वर्ष में। नभ में नई उड़ान के लिए नए वर्ष में। मंगलमय आह्वान के लिए नए वर्ष में। खुशियों से आँगन महकाएँ नए वर्ष में। जन-मन में उल्लास जगाएँ नए वर्ष में।
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