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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



हाइकू

ओम प्रकाश क्षत्रिय

डूबता सूर्य
स्वागत करे चाँद
आ जा तू वर्ष
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पकी फसलें
रच दे इतिहास
यादों के दिन.
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वर्ष ही लाया
खुशियों का तराना
राग पुराना.
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ठण्ड की भेंट
नए वर्ष का कोट
पहने सभी.

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नई सौंगाते
बाँटता चला गया
नया था वर्ष.
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क्षण ने बोई
दिन की जो फसलें
वर्ष ने काटी.
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क्षण की आंधी
निगल गई वर्ष
यादों के साथ.
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नहाए दिन
बनठन के लाएं
नया ये वर्ष.
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वर्ष के पृष्ठ
लिखेगा इतिहास
यादों का पेन.
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बूढ़ा गया है
सोलह का यौवन
आ जा सत्रह.
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यादों के बीज
समय की भूमि पे
रचे साहित्य.
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सूरज बोता
बारह-माह बीज
काटता दिन.

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 आओ | लिख दो
मन की अभिलाषा
बोले ये वर्ष.
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 हाथों से रेत
फिसल गए दिन
यादों के बिन.
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 ख्वाबों की रात
वर्ष के 12 हाथ
रचते दिन.
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