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वर्ष: 1, अंक 8, फरवरी, 2017



ख़ुदा ने भी अजब तमाशा किया

डॉ०अनिल चड्डा


ख़ुदा ने भी अजब तमाशा किया, बना मुझे मुझी से किनारा किया। ज़माने से तो न थी उम्मीद कोई, उन्होंने भी रुख न दोबारा किया। बहुत शौक था दोस्तों का लेकिन, दुश्मनों से ही हमने गुजारा किया। आबाद किया जिसे दिल में हमने, बर्बादी का उसी ने नजारा किया। 'अनिल’का था मुश्किल जीना अकेले, मरना न तुझ बिन गँवारा किया।
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