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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



नेता जी तोरे द्वारे खड़ा ..........


अशोक दर्द


 
नेता जी तोरे द्वारे खड़ा इस बात पे दर्द अड़ा |
कैसे निकल गये सब आगे मैं रह गया वहीँ पड़ा ||
 
मुझको भी तरकीब बताओ कैसे करूं घोटाले |
कैसे ले आऊं सत्ता में अपने समधी साले ||
कैसे अपने मुंह में डालूँ जनता के निवाले |
कैसे जनता को भरमाऊं देकर नई नई चालें |
इन सारी बातों का तो तू राज बता | नेताजी ........||
 
कैसे लूटी जाए भोली जनता की लाचारी |
कैसे कैसे जाए खरीदी भय भूख बिमारी ||
कैसे कैसे हांकी जाए भ्रष्टाचार की गाड़ी |
कैसे खेली जाये हमेशा यह सत्ता की पारी ||
मुझको भी सिखला दो तुम यह सारा लफड़ा |नेताजी ......||
 
एजेंसी ठेकेदारी नौकरी कैसे जाये बंटाई |
मलाई अपने चमचों को कैसे जाये खिलाई ||
आश्वासन की घुट्टी जनता को कैसे जाये पिलाई |
शिलान्यासों की मृगतृष्णा में जनता कैसे जाये भरमाई ||
इन सारी बातों की दो तकनीक सुझा | नेताजी .......||
 
कैसे कोठी करें और बैंक बेलेंस बढ़ाऊं|
अपने खाते विदेशों में जाकर कैसे खुलवाऊं ||
मुंगेरी लाल के सपने जनता को कैसे दिखलाऊं |
भोली भाली जनता को अपने पीछे कैसे लगाऊं ||
इन सारी बातों का दो प्रोसेस बता | नेतेजी .........||
 
सत्ता की राह में जो रोड़ा सा बन जाए |
साम दाम  और दण्ड भेद से भी काबू न आये ||
पार्टी के खिलाफ़ जो लोगों को भड़काए |
हमारी बदनीयत और दुर्नीतियाँ लोगों को बतलाये ||
ऐसे दुष्ट विरोधी को फिर कैसे दूं रगड़ा |नेताजी ........||
           

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