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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



दी नहीं जाती


डाॅ. कौशल किशोर श्रीवास्तव


इतनी है पास पी नहीं जाती,
जरा सी फिर भी द़ी नहीं जाती।

नशा मै का अलग ही रहता है,
मस्ती वह कहीं से नहीं आती।

तुम्हारे पास वह पैमाना नहीं,
जिसमें मस्ती उड़ेल दी जाती।

गोद साकी की हो नशा भी हो,
मौत ये हर किसी को नहीं आती।

नशे में साकी को तबज्जो दो,
उससे बेरूखी सही नहीं जाती।
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