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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



चल दिए वो सभी

अनिरुद्ध सिन्हा


 
चल दिए वो  सभी  राब्ता  तोड़कर 
हमने चाहा  जिन्हें फासिला  तोड़कर

उम्र -भर के लिए हम तो सजदे में थे 
क्या मिला  आपको  आइना तोड़कर 

इक ज़रा  देर  को  मुस्कुरा  दीजिए
हम  चले   जाएंगे  दायरा  तोड़कर 

हमको सस्ती जो शोहरत दिलाता रहा 
रख दिया हमने वो झुनझुना  तोड़कर 

यूँ  कभी  आते-जाते  रहो  तो सही 
क्या मिलेगा तुम्हें सिलसिला तोड़कर 
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