Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



शर्तों में


अमरेश सिंह भदोरिया


 
मिलती है कहीं जीत
कहीं हार शर्तों में।
चलता है जिंदगी का 
ये कारोबार शर्तों में। 
     1.
शर्तों से मिलता जन्म
और परवरिश शर्तों में;
मिलती है शिक्षा, दीक्षा
और संस्कार शर्तों में। 
     2.
शर्तों से जुड़कर होती 
यहाँ सगाई और शादी;
जीवन में मिलता दांपत्य
का अधिकार शर्तों में। 
     3.
प्रेम और प्यार की जहाँ
बुनियाद बनती शर्त;
रिश्तों को मिलता फिर
नया आधार शर्तों में। 
     4.
शर्तों से जुड़कर आती
हैं बीमारियां अनेक;
होता है उनका सफल
रोगोपचार शर्तों में।
     5.
वनिज कर्म की परिभाषा
बन जाती जहाँ शर्त;
फिर चलता खूब नकद
या उधार शर्तों में। 
     6.
शर्तों से मिलकर जिंदगी
भी शर्त बन गयी;
होता है "अमरेश" भला-
बुरा व्यहार शर्तों में।
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें