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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



हमको आगे बढ़ना है


डॉ. प्रमोद सोनवानी ‘पुष्प’


  
मंजिल को जब है पाना ,
खतरों से क्यों कर डरना ।
बाधाओं से टकरा कर ,
हमको है आगे बढ़ना ।।1।।
आँधी हो चाहे तूफान ,
पथ पर हमें न है रुकना ।
हर सूरत में जैसा भी हो ,
हमको है आगे बढ़ना ।।2।।
पढ़-लिखकर हम सबको ,
भारत की है शान बढ़ाना ।
इसकी सेवा में रत रहकर ,
हमको है आगे बढ़ना ।।3।।

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