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परिचय

मनोज कुमार शुक्ल‘‘मनोज’’


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   साहित्यिक परिचय एवं साहित्य योगदान

   मेरा समस्त परिवार साहित्य के वातावरण में रहा है । मेरे पिता स्व. रामनाथ शुक्ल ‘श्री नाथ ’एवं मेरे बड़े चाचा स्व. दीनानाथ शुक्ल ‘महोबा वाले ’ मेरे कजिन श्री अशोक शुक्ल साहित्य जगत में सशक्त स्ताक्षर के रूप में अपनी पहिचान बना चुके हैं । मैं विजया बैंक में उप प्रबंधक के रूप में सतना से रिटायर हुआ ।

   मैने अपनी विजया बैक सर्विस के दौरान हिन्दी के प्रसार प्रचार के लिए एवं हिन्दी दिवस के दौरान विभिन्न साहित्यिक विभूतियों का सम्मान कर हिन्दी भाशा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्षित किया है । अपने सेवा कार्य में जबलपुर रायपुर रतलाम सतना जैसे शहरों में रहा । अपने कालेज जीवन से हिन्दी में कहानियाँ लेख कविताओं आदि का प्रकाशन प्रसारण विभिन्न पत्र पत्रिकाओं दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में होता रहा । जबलपुर के बाद रायपुर में मेरा साहित्यिक योगदान कुछ ज्यादा रहा है चूँकि वहाँ मैने लगभग 11 वर्ष गुजारे हैं और दो कृतियों का प्रकाशन भी हुआ ।

   मेरा जबलपुर में प्रथम कहानी संग्रह ‘क्रांति समर्पण’ जिसमें मेरी एवं मेरे पिता जी स्व.श्री रामनाथ शुक्ल ‘श्री नाथ’ की सयुंक्त रूप से कहानियों का प्रकाशन लगभग 1980में हुआ ।

   इसके पश्चात् रायपुर से मेरा एक ‘ याद तुम्हें मैं आऊॅंगा ’ प्रथम काव्य संग्रह का प्रकाशन हुआ ।

   सन् 1997 के आसपास मेरा एवं मेरे पिता जी के संयुक्त रूप से 40 कहानियों का संग्रह ‘एक पाव की जिन्दगी ’ का प्रकाशन रायपुर में हुआ ।

   सन् 2014 में एक काव्य संग्रह ‘संवेदनाओं के स्वर ’ विमोचन हुआ है । यह काव्य संग्रह इन्टरनेट पर अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत है।

   इसके अलावा वर्तमान में एक काव्य संग्रह ‘स्मृतियों के आँगन में ’ एवं एक कहानी संग्रह प्रकाशन के लिए तैयार है । इसके साथ ही हमारे पिता जी श्री राम नाथ शु क्ल जी की उनके द्वारा लिखित एक आत्म कथा भी तैयार है । जिसका प्रकाशन निकट भविष्य में शीघ्र होने जा रहा है ।

   संस्कारधानी जबलपुर म.प्र. में जन्म 16 अगस्त 1951 / पिता स्व. रामनाथ शु क्ल ‘श्री नाथ ’ से साहित्यिक विरासत एवं प्रेरणा / जबलपुर विश्वविद्यालय से एम.काम. / अपने विद्यार्थी जीवन से ही लेखन के प्रति झुकाव / विजया बैंक में सहायक प्रबंधक से सेवा निवृत / जबलपुर ,रायपुर, रतलाम, सतना में अपनी सेवा कार्य की अवधि के दौरान साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में लगातार सहभागिता / राष्ट्रीय ,सामाजिक एवं मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत साहित्य सृजन की अनवरत यात्रा/ जबलपुर की आदर्श छात्र मंडल,मिलन,अनेकान्त, वर्तिका,मंथन,जागरण, रायपुर की ऋचा, छत्तीसगढ़ी हिन्दी साहित्य संस्था, सिंधी साहित्य सभा, हिन्दी साहित्य मंडल, वक्तामंच, रतलाम की अनुभूति,पाठक मंच, सतना की रसरंग, पाठक मंच आदि अनेकों संस्थाओं में सहभागिता एवं सम्मान । छह माह के टोरेन्टो कनाडा प्रवास के समय अनेक संस्थाओं में सहभागिता .

   कहानी, कविता निबंध लेख एवं व्यंग्य विधा में लेखन प्रकाशन / हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अभिरुचि/ दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर, नवभारत, देशबन्धु,अमुतसंदेश, समवेत शिखर, रौद्रमुखीस्वर, नवीन दुनिया, युगधर्म, स्वदेश, आदि में प्रकाशन के साथ साथ विजया विकास विजया बैंक, रेवा भारतीय स्टेट बैंक, विवरणी, विवरणिका,रुचिर संस्कार, जर -जर किश्ती ,प्राची ,विचार वीथी, मोमदीप एवं वीणा आदि विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन / इंटर नेट की साहित्यकुंज, विचार वीथी आदि पत्रिकाओ में प्रकाशन एवं प्रोफाइल । जबलपुर ,रीवा आकाशवाणी एवं रायपुर दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण /

   कहानी संग्रह ‘‘क्रांति समर्पण एवं ‘‘एक पाव की जिंदगी ’’ एवं काव्य संग्रह ‘‘याद तुम्हें मैं आऊॅंगा ’’ के साथ ही 2014 में ‘‘ संवेदनाओं के स्वर ’’ का प्रकाशन / इन्टरनेट में ‘‘ संवेदनाओं के स्वर ’’ अलावा एक काव्य संग्रह ‘स्मृतियों के आँगन में ’ एवं एक कहानी संग्रह प्रकाशन के लिए तैयार है । इसके साथ ही इनके पिता जी स्व. श्री रामनाथ शुक्ल श्रीनाथ की एक आत्म कथा भी तैयार है । जिसका प्रकाशन निकट भविष्य में शीघ्र होने जा रहा है ।

मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’
58,‘‘ आशीष दीप’’
उत्तर मिलौनीगंज जबलपुर (मध्यप्रदेश )

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