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वर्ष: 1, अंक 11, अप्रैल(द्वितीय), 2017



“महिला प्रगति ”

ब्रिजेन्द्र अग्निहोत्री

मन में लिए 
लड़के को शिक्षित करने कि चाह
लड़की को दिखाती वह 
घर के कामों कि राह
महिला सशक्तिकरण के इस युग में 
लिंगानुपात को समान करने की सभाएं
टीवी, अख़बार, पत्रिकाओं पर विज्ञापन 
समाजसेवकों, राजनेताओं द्वारा दिए गए भाषण 
व्यर्थ जा रहे हैं 
महिला प्रगति के विपक्ष में 
महिला ही दिख रही है 
कम कपडे, खुली देह, निर्विरोध भ्रमण को ही वह 
महिला प्रगति समझ रही है 
नब्बे फीसदी औरतें 
बच्चों में स्वयं भेद करके 
दोष पुरुषों पर मढ रही हैं  
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