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वर्ष: 1, अंक 11, अप्रैल(द्वितीय), 2017



रोशनदान

अमरेन्द्र सुमन

एक कमरे में 
उसकी खुबसूरती के अलावे
बहुत सारी उपयोगिताएॅ हैं इसकी

गर्मियों में 
पसीने से सराबोर
शरीर को 
इससे गुजरती हवाएॅं पहुॅंचाती हैं आराम

सर्दियों में 
ठिठुरते देह के लिये 
गुनगुनी धूप
और आंतरिक उर्जा

आकाश की उॅचाइ्रयों में
उड़ रहे परिंदों की स्वच्छन्दता का
एकाकीपन में अवलोकन

घर से बाहर न निकल पाने की 
व्याकुल भरी मजबूरी में
जीवन-पर्यन्त साथ निभाने की कसमें
खा चुके प्रेमी युगल की आपसी वार्ताएॅं
इन्हीं रोशनदानों से होकर गुजरती हैं 

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