Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 11, अप्रैल(द्वितीय), 2017



जो करते थे बुराई उनकी चौराहों पर

विश्वम्भर व्यग्र

जो करते थे बुराई उनकी चौराहों पर
वो आ ही गये  हैं देखिये  दौराहों पर

डगमगा रही हैं आज इमारतें ऊँची,
जो  खड़ी  थी  वर्षों से तिराहों पर

होने लगा है विरोध गलत कामों का,
लगने लगी बंदिश अब मनचाहों पर

पहनती हैं स्वयं पौशाकें झीनी-झीनी
दोष मँढ़ती है ये दुनियां जुलाहों पर

उसको चिन्ता है केवल इस बात की,
दिल भी आने लगा व्यग्र अनचाहों पर
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें