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वर्ष: 1, अंक 10, अप्रैल, 2017



" जवानी आैर बुढ़ापा "
लेखक - ड़ॉ. मोहम्मद युनूस बट
अनुवाद - अखतर अली




  पहले बुढापा कलात्मक हाेता था आज कल भयानात्मक हाेता है | यह इस पर निर्भर करता है कि आप बुढ़ापे की दुनियां मे जवानी के काैन से रास्ते से दाखिल हुए है | विशेषज्ञों ने दावा किया है कि 2035 तक देश मे बूढ़ाे की संख्या दाेगुनी हाे जायेगी | अब ये ताे दुनियां का नियम है कि यहां अगर काेई चीज़ बहुत ज्यादा माञा मे है ताे उसकी कीमत बहुत कम हाे जाती है | कालेज के प्रोफेसर ने पांच लड़काे काे कक्षा मे खड़ा किया आैर कहा - तुम चार लड़काे के दिमाग़ की कीमत पांच साै रूपये प्रति ग्राम आैर मेरे से कहा - तुम्हारे दिमाग की कीमत ड़बल यानि हज़ार रूपये प्रति ग्राम है | अपने दिमाग कीमत जान कर मै पूरी तरह खुश हाे भी नही पाया था कि प्राेफ़ेसर साहब ने बताया कि जाे वस्तु बहुत कम माञा मे पाई जाती है उसकी कीमत हमेशा बहुत अधिक हाेती है | मुझे लगता है बूढ़ाे की बढ़ती तादाद से उनकी मार्केट वेल्यू एकदम घट जायेगी | जनसंख्या राेकने के तरीके ढूंढ़ निकाले बुढ़ापा राेकने का काेई उपाय नही है | अब जब चाराे तरफ़ बूढ़े ही बूढ़े हाे जायेगे ताे उन्हे बूढ़ा समझ उनकी इज्ज़त काैन करेगा ?

  बूढ़ाे काे हमारे समाज मे वही स्थान प्राप्त है जिस स्थान पर वह बैठे रहते है | हम बूढ़ाे के खिलाफ़ नही क्याेकि हमे भी एक दिन बूढ़ा हाेना है लेकिन बूढ़े हमारे खिलाफ़ रहते है क्याेकि उन्हे अब काैन सा जवान हाेना है |

  हमारे यहां बूढ़े नसीहत देने के काम आते है | एक बूढ़े ने बच्चे काे नसीहत देते हुए कहा - बेटे अपनी बाईक की रफ्तार उतनी ही रखना जितनी मेरी दुआआे की रफ्तार है यानि चालीस किलाे मीटर प्रति घंटा, ये उनकी दुआआे की रफ्तार है नसीहताे की रफ्तार बाईक की रफ्तार जैसी है |

  बूढ़े हमेशा ये साेच कर परेशान रहते है कि नई पीढ़ी बड़ी हाेकर क्या करेगी ? वह भी यही साेच कर परेशान रहेगी कि ऩई पीढ़ी बड़ी हाेकर क्या करेगी ?

  एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पच्चीस प्रतिशत लाेग यह मानते है कि बूढ़े एकदम खाली रहते है जबकि तीन प्रतिशत बूढ़े भी इस रिपोर्ट से सहमत नही है उन सब का कहना है कि हमारे पास पल भर की भी फ़ुरसत नही है | दरअसल जवान जिस काम काे पांच मिनट मे कर के दिन भर खाली बैठे रहते है, बूढ़े उसी पांच मिनट के काम काे करने मे पूरा दिन लगा देते है लिहाज़ा उनके पास पांच मिनट का भी टाईम नही हाेता | बुढ़ापे की बस एक ही बीमारी है आैर वह है बुढ़ापा आैर बुढ़ापे के अतिरिक्त आैर कुछ नही |

  बुढ़ापे मे अक्सर भूल जाने की आदत हाेती है | तीन बूढ़े आपस मे बात कर रहे थे , एक ने कहा - जब मै सीढ़ियाे के बीच मे पहुचता हूं तब भूल जाता हूं कि मेरे काे चढ़ना है या उतरना, दूसरे ने कहा - जब मे फ्रिज खाेलता हूं ताे भूल जाता हूं कि मेरे काे कुछ रखना है या निकालना है, तीसरे ने कहा - मै कभी कभी यही भूल जाता हूं कि मै अब बूढ़ा हाे गया हूं | वैसे मै ये बात दावे के साथ कह सकता हूं कि आप किसी भी बूढ़े काे झाड़ेगे ताे उसमे से एक जवान आदमी निकलेगा |

  कहते है स्वर्ग मे काेई बूढ़ा नही हाेता आैर अगर यहां बूढ़ाे की संख्या बढ़ती गई ताे फिर इस देश के स्वर्ग बनने की काेई संभावना नही रहेगी |

  अब जाे लाेग कहते है कि 2035 तक बूढ़ाे की संख्या दाेगुनी हाे जायेगी उन्हे मै ये भी बता दू उस वक्त जाे बूढ़े हाेगे वाे बुढ़ापे की सभी परिभाषाये बदल देगे क्याेकि उल वक्त हम बूढ़े हाेगे |

  एक बात आैर बुढ़ापे की सभी बाते बूढ़े पुरूषाे के बारे मे ही हाेती है बूढ़ी आैरताे के बारे मे नही, क्याेकि आैरत कभी बूढ़ी नही हाेती |

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