Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 10, मार्च, 2017



जन्मदिन

शबनम शर्मा

साल भर इन्तजार अपने 
जन्मदिन का, 
पहनाता है भगवान इक 
माला हमारे गले में
वर्षों के मनके पिरोकर, 
दिखती नहीं, पर पहने 
रहते हम,
हर वर्ष निकाल लेता वो 
अपना इक मनका,
वक्त के साथ ये मनके 
कम होते चलते व 
रह जाता सिर्फ वह कच्चा 
मैला सा धागा,
जो अब उठा नहीं पाता 
हमारे जीवन का बोझ, 
छूते, महसूस करते हम 
डसकी मौजूदगी, पर 
पता है ये अब सह न 
पायेगा हमारा बोझ, टूट
जायेगा व ले जायेगा संग 
साँसों की डोर।
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें