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वर्ष: 1, अंक 10, मार्च, 2017



तन कमल सा

रेनू सिरोया कुमुदिनी

तन कमल सा खिला मन चहकने लगा
नाम उनका लबों पर महकने लगा

यूँ नज़र से नज़र का मिलन जो हुआ
रात दिन दिल कसम से बहकने लगा

नाम पूछा हवाओं ने हमराज का
होंठ चुप थे मगर दिल धड़कने लगा

गम बहुत था दिया ज़िन्दगी ने मगर
साथ पाकर सनम ये सँवरने लगा

याद है वो मुलाकात गुज़री हुई
हर हसीं पल नज़र से गुजरने लगा

ज़िन्दगी में मुझे हर ख़ुशी मिल गई
मन कली बन कुमुदिनी निखरनें लगा

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