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वर्ष: 1, अंक 10, अप्रैल, 2017



मानवता की पहचान

ब्रिजेन्द्र अग्निहोत्री

स्वतंत्र इच्छा प्राप्त व्यक्ति 
मानव- जीवन का वरदान है 
हो इसका उपयोग उचित न 
तो यह ही यमदान है

स्वतंत्र-व्यक्तित्व का है यह शाप 
मानव समझे खुद को जब भिन्न 
आत्म-सदृश न किसी को माने 
हो जाता वह बिलकुल खिन्न 
संघर्षों पर विजय जो पाए 
वह मानव, परम महान है 

विकास के मार्ग पर बढ़ 
ऐ मानव! तज निज अभिमान है 
स्वर्थ छोड़ कर प्रेम सभी से 
स्वार्थ, पशुओं कि पहचान है 
जग में सबको सम समझना 
मानवता कि पहचान है 
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