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वर्ष: 1, अंक 10, अप्रैल, 2017



आधुनिक मानव

ब्रिजेन्द्र अग्निहोत्री

राजनीति के इस दौर में 
सुख, समृद्धि, यश पाने के लिए 
मानव.... निर्लज्जता की सभी पराकाष्ठाएं 
पार कर जाता है.

अपनी इज्जत को, 
शोहरत की खातिर,
दूसरों के हाथ में सौंप देता है.

अपने स्वच्छ ह्रदय पर, 
अपने हाथों से, 
कालिख मल लेता है.

दर्द में डूबे चेहरे को,
खुशियों की चादर से ढक लेता है.

जब चेहरा 
वास्तविक कांति से युक्त होता है
तब उसका चेहरा- 
भावहीन, कष्टसाध्य नजर आता है  

जब तक समाज को 
वास्तविकता का ज्ञान होता है 
वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर 
अपना साम्राज्य फैला चूका होता है.
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