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वर्ष: 1, अंक 10, अप्रैल, 2017



आज फिर ओस

अशोक बाबू

आज फिर 
ओस 
हथेली पर 
मेरे 
थम गई 
जैसे जम गई 
मैंने पूछा -
बहुत सुन्दर प्रतीत होती हो 
सौन्दर्य  पूर्ण 
खूब मोती सी लगती हो I 

ओस बोली-
जनाब शुक्रिया 
मैं पल भर की 
मोती सी लगती हूँ 
अभी चुरा लेगा 
मुझे 
तुम्हारी हथेली से 
रवि
दिखा लाल पीली आँखें  
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