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वर्ष: 1, अंक 10, अप्रैल, 2017



वो अपने ही क्या हुए

डॉ०अनिल चड्डा


वो अपने ही क्या हुए, जिन्होंने परायों सा एहसास दिया,
खुशियों के माहौल में हमारा दिल उदास किया ।

लाख दुआएं देने से भी, होता नहीं किसी का भला,
जब तक किसी अच्छाई ने न अंदर तेरे निवास किया ।

कोई नहीं पहचानता है, न कोई पहचाने कभी,
जब तलक किसी के लिए, तूने न कुछ ख़ास किया ।

माफ़ी माँग के खुद को भी धोखा देने से क्या फायदा,
गलती का जब तक तूने न अंदर से एहसास किया ।

खतरों की दुनिया है ये, पग-पग पे हादसे होते हैं,
कदम उठाने से पहले क्यों न मुश्किल का आभास किया । 
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