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वर्ष: 1, अंक 2,  सितम्बर, 2016

एक बात समझ में नहीं आती

 

एक बात समझ में नहीं आती,

तेरी याद अब क्यों नहीं आती।

दराज़ों से झांकती है एक किरण,

उसे यूँ आने में शर्म नहीं आती।

आँख भर आने को एक ग़म काफी है,

बारिश बिन बादल कभी नहीं आती।

उसे बस एक ही दुःख सताता है,

सारी रात नींद क्यों नहीं आती।

आँख मलने से रौशनी नहीं बढ़ती,

किताबें पढ़ने से ही अक्ल नहीं आती।

 

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