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वर्ष: 1, अंक 3, 14 सितम्बर, 2016

हिंदी दिवस विशेषांक


कविता


अंजनी श्रीवास्तव


 

                                                              शब्द विशेष

-    अंजनी श्रीवास्तव

                   M: 9819343822 



हमें  ठीक  से याद नहीं
कौन -कौन  से शब्द हमने
नानी -दादी  से ,कौन -कौन से
मौसी और बुआ  से ,

कौन सी कहावत अम्मा  से और

कौन -कौन  से  सबक पिता  से

सीखे थे ?
ऐसे बहुत सारे शब्द हमारे 

 दिमाग में पड़े  हैं , मगर गडमगड  हैं
जीवन भर का खाका  शब्द ही खींचते  हैं
शब्द ही मस्तिष्क  और किताबों  में छपते  हैं
शब्द ही हृदयवेधी  बाण का काम करते हैं
घर ,व्यवसाय ,सम्पत्ति  की  तरह

शब्द भी हम संतानों  को सौंप  देते  हैं
उनके  वास्तविक  अर्थों और

 उपयोगिताओं से अनभिज्ञ रखते  हुए
जिस समय हमें यह याद जाता है कि

 फलां  शब्द हमने  उस व्यक्ति विशेष से सीखा  था
उसी  क्षण , उस व्यक्ति विशेष को हमारी तरफ़
से कृतज्ञता  व्यक्त कर दी  जाती है
तब शब्द मुस्कुरा उठते  हैं


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