Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 3, 14 सितम्बर, 2016

हिंदी दिवस विशेषांक


कविता


डॉ०अनिल चड्डा


शुक्रिया जता कर एहसान चुकता कर दिया,
दो ही लफ़्ज़ों में था हिसाब पूरा कर दिया!

शोर करते थे बहुत, कर देंगें ये, कर देंगें वो,
वक़्त पड़ने पर तो मुश्क़िलों को दूना कर दिया!

साज़िशों से भर चुकी राहों पे चलना था मुहाल,
तूने भी कर अलविदा, राहों को सूना कर दिया!

गौर फ़रमायेंगें क्या जो अपने में मशगूल हों,
आँसुओं ने ग़म को अपने थोड़ा हल्का कर दिया!

है ‘अनिल’ बर्बाद, अब आबाद क्या होना सनम,
अपनों ने बर्बादी में ख़ासा इजाफा कर दिया!


कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें
www.000webhost.com