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वर्ष: 1, अंक 3, 14 सितम्बर, 2016

हिंदी दिवस विशेषांक


दोहा-सलिला


संजीव वर्मा सलिल


कर माहात्म्य

*

कर ने कर की नाक में, दम कर छोड़ा साथ

कर ने कर के शीश पर, तुरत रख दिया हाथ

*

कर ने कर से माँग की, पूरी कर दो माँग

कर ने उठकर झट भरी, कर की सूनी माँग

*

कर न आय पर दिया है, कर देकर हो मुक्त

कर न आय दे पर करे,  कर कर से संयुक्त

*

कर ने कर के कर गहे, कहा न कर वह बात

कर ने कर बात सुन, करी अनसुनी-  घात

*

कर कइयों के साथ जा, कर ले आया साथ

कर आकर सब कुछ हुई, कर हो गया अनाथ

*

दरवाजे पर थाप कर,  जमा लिए निज पाँव

कर ने कर समझ नहीं, हार गया हर दाँव

*

कार छीन कर ने किया, कर को जब बेकार

बेबस कर बस से गया, करि हार स्वीकार

*

 

- संजीव वर्मा सलिल

 


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